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बीमा से जुड़े प्रचलित शब्द

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  • ACTUARY

    A person who compiles and analyses statistics to calculate & manage insurance risks and premiums.

  • AGENT

    An insurance company representative who sells and services life insurance contracts for the insurer; he/ she is an intermediary between the insurer and the policyholder.

  • ANNUITY

    An insurance contract that provides income for a specified period of time, such as a number of years or for life.

  • ASSIGNMENT

    Assignment is the transfer of rights in an insurance policy from one person to another. It is a means whereby the beneficial interest, right and title under a life insurance policy gets transferred from assignor (Policyholder) to assignee.

  • BANCASSURANCE

    It refers to the sale of insurance products through Bank’s distribution channels.

  • BENEFICIARY

    The beneficiary is the person or entity, named in the policy as the recipient of the life insurance benefit in the event of policyholder's death.

  • क्लेम

    एक इंश्योरेन्स क्लेम किसी जीवन बीमा पॉलिसी के लाभार्थी या नामिती या विधिक उत्तराधिकारी द्वारा बीमा कम्पनी के पास किया जाने वाला औपचारिक अनुरोध होता है, जिसमें वह पॉलिसी की शर्तों के आधार पर भुगतान की मांग करता है। बीमा कंपनी क्लेम की समीक्षा करके उसका वैधता की जांच करती है, और उसके बाद अनुमोदित होने पर बीमित व्यक्ति या अनुरोध करने वाले व्यक्ति (बीमित की ओर से) को भुगतान करती है।

  • आरम्भ तिथि

    यह बीमा कम्पनी द्वारा जोखिम स्वीकार करने के बाद पॉलिसी आरम्भ होने की तिथि होती है।

  • परिपक्वता तिथि

    यह बीमा पॉलिसी के वैध रहने की अन्तिम तिथि होती है।

  • मृत्यु लाभ

    यह किसी बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर उसके लाभार्थी को भुगतान की जाने वाली धनराशि होती है।

  • एंडाउमेन्ट प्लान (बंदोबस्ती योजना)

    यह एक ऐसा प्लान होता है, जिसमें पॉलिसीधारक यदि संविदा की समय-अवधि पूरी होने तक जीवित रहता है तो उसे एक निश्चित धनराशि का भुगतान किया जाता है, अथवा पॉलिसी की परिपक्वता तिथि से पहले बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उसके लाभार्थी को भुगतान किया जाता है।

  • अपवर्जन (एक्सक्ल्यूजन)

    यह ऐसी शर्त होती है जिसके अन्तर्गत लाभों का भुगतान नहीं किया जाता है, इसे अपवर्जन (एक्सक्ल्यूजन) कहा जाता है। इसका उद्देश्य पॉलिसी की शर्तों के बारे में गलतफहमी से बचना है।

  • फ्रीलुक अवधि

    फ्रीलुक अवधि में व्यक्ति को यह विकल्प दिया जाता है कि वह पॉलिसी दस्तावेज प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों अन्दर पॉलिसी के नियम एवं शर्तों की समीक्षा कर ले। यदि वह पॉलिसी के नियम एवं शर्तों से असहमत होता है, तो उसके पास यह विकल्प होता है कि वह आपत्ति का कारण बताते हुए पॉलिसी लौटा सकता है। ऐसी स्थिति में पॉलिसी निरस्त कर दी जाएगी, और बीमा कम्पनी उस व्यक्ति द्वारा दिया गया भुगतान उसे वापस कर देगी, और उसमें से चिकित्सीय जांच, स्टैम्प ड्यूटी चार्ज तथा अन्य चार्ज पर होने वाले व्यय काट लिए जाते हैं। दूरस्थ मार्केटिंग के माध्यम से बेची जाने वाली पॉलिसी में फ्रीलुक अवधि 30 दिन की होती है।

  • ग्रेस पीरियड (अनुग्रह अवधि)

    इंश्योरेन्स पॉलिसी कवरेज को जारी रखने के लिए प्रीमियम भुगतान की नियत तिथि के बाद भी पॉलिसी धारक को एक निश्चित अवधि का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, जिसके दौरान पॉलिसी कवरेज व्यपगत (लैप्स) नहीं होती है। यह प्रीमियम भुगतान की नियत तिथि के बाद एक निश्चित अवधि होती है, जिसके दौरान पॉलिसीधारक अपने प्रीमियम का भुगतान कर सकता है, और इस अवधि के दौरान पॉलिसी का प्रोटेक्शन कवर बना रहता है।

  • इंश्योरेबिलिटी

    बीमा के लिए स्वीकार्य होने के गुण को इंश्योरेबिलिटी कहते हैं। किसी व्यक्ति या वस्तु की इंश्योरेबिलिटी किसी बीमा कम्पनी के नियमों एवं नीतियों के आधार पर निर्धारित की जाती है। बीमा आवेदन से सम्बन्धित सभी नियमों एवं परिस्थितियों के योगफल जैसे कि उसके स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा, जोखिम प्रोफाइल तथा क्षति की सम्भावना का निर्णय बीमा कम्पनी की आवश्यकताओं या मानकों के अनुसार लिया जाता है, और यह पता लगाया जा सकता है कि उस व्यक्ति को बीमा दिया जा सकता है या नहीं अर्थात वह इंश्योरेबेल है या नहीं।

  • बीमा

    बीमा इसलिए किया जाता है, ताकि बीमित व्यक्ति या उसकी मृत्यु की स्थिति में लाभार्थी को अनपेक्षित परिस्थितियों से सुरक्षित रखते हुए उसकी क्षतिपूर्ति की जा सके।

  • आईआरडीएआई

    यह भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण का अंग्रेजी में संक्षिप्त रूप है। यह भारत में बीमा व्यवसाय को नियंत्रित करने वाली प्रमुख संस्था है। यह पॉलिसीधारक के हित की सुरक्षा करती है, भारत में बीमा उद्योग की सामान्य वृद्धि को विनियमित करती है, बढ़ावा देती है एवं सुनिश्चित करती है।

  • ज्वॉइन्ट लाइफ

    यह एक बीमा संविदा होती है, जिसमें एक ही पॉलिसी में दो लोगों को बीमा प्रदान किया जाता है।

  • कीमैन इंश्योरेन्स

    इसे प्रमुख व्यक्ति बीमा (की पर्सन इंश्योरेन्स) भी कहते हैं। इसमें इस प्रकार से कवर तैयार किया जाता है कि किसी संगठन के अति महत्वपूर्ण कम्रचारी की मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में उस कम्पनी को सुरक्षा या प्रतिपूर्ति प्रदान की जा सके।

  • व्यपगमन (लैप्स)

    यह ऐसी पॉलिसी होती है, जिसे प्रीमियम का भुगतान ना करने के कारण समाप्त कर दिया गया होता है। जब प्रीमियम की नियत तिथि के बाद मिलने वाले ग्रेस पीरियड के अन्दर भी प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो सामान्य तौर पर पॉलिसी व्यपगत (लैप्स) हो जाती है।

  • लाइफ एश्योर्ड

    लाइफ एश्योर्ड वह व्यक्ति होता है, जिसका जीवन किसी बीमा कम्पनी द्वारा बीमित किया जाता है।

  • लाइफ कवर

    यह बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर भुगतान की जाने वाली धनराशि होती है।

  • एकमुश्त लाभ (लम्प सम बेनिफिट)

    यह कई बार भुगतान करने के बजाय केवल एकबार में पूरी धनराशि का भुगतान करने पर दिया जाने वाला लाभ होता है।

  • लॉयल्टी एडीशन

    यह इन्सेन्टिव एक बीमा कम्पनी द्वारा बीमित व्यक्ति को दिया जाने वाला एक अतिरिक्त लाभ होता है, जो संविदा की पूरी अवधि के दौरान पॉलिसी को पूर्णतया सक्रिय रखने के लिए होता है। इसमें दर का निर्धारण बीमा कम्पनी के प्रदर्शन के आधार पर होता है।

  • जीवन बीमा

    जीवन बीमा एक पॉलिसीधारक तथा बीमा कम्पनी के बीच में संविदा होता है, जिसमें बीमा कम्पनी किसी बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर उसके नामिती / लाभार्थी को एक निश्चित धनराशि देने का वचन देती है।

  • मास्टर पॉलिसीधारक

    यह समूह पॉलिसियों की स्थिति में पॉलिसीधारक होता है।

  • मैच्योरिटी क्लेम

    पॉलिसी की निर्धारित अवधि के अंत में पॉलिसीधारक को दिए जाने वाले भुगतान को मैच्योरिटी क्लेम कहते हैं।

  • मनी बैक प्लान

    मैच्योरिटी के समय एकमुश्त राशि दिए जाने के बजाय मनी बैक प्लान में बीमित व्यक्ति को नियमित समय अंतराल पर बीमित राशि (सम एश्योर्ड) का एक निश्चित प्रतिशत भुगतान किया जाता है।

  • नैतिक जोखिम (मोरल हैजार्ड)

    नैतिक जोखिम (मोरज हैजार्ड) ऐसे मामलों में उत्पन्न होता है, जब हम देखते हैं कि जीवन बीमा की एक उचित आवश्यकता नहीं है अथवा जब कोई व्यक्ति अपने सीमा से अधिक बड़े बीमा का प्रस्ताव देता है।

  • रुग्णता (मॉरबिडिटी)

    यह किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को बीमारी या विकलांगता की सम्भावना होती है।

  • मरणशीलता (मोरटैलिटी)

    यह किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को मृत्यु की सम्भावना होती है।

  • बंधक (मोर्टगेज)

    यह एक विधिक अनुबंध होता है, जिसमें किसी परिसम्पत्ति या सम्पत्ति का स्वामी (बंधककर्ता / मोर्टगेजर) अपने स्वामित्व के अधिकार को सशर्त रूप से लोन की प्रतिभूति के रूप में ऋणदाता (मोर्टगेजी) को सौंपता है। ऋणदाता के प्रतिभूति हित को टाइटल प्रलेखों की पंजिका में अभिलिखित करके उसे सार्वजनिक सूचना बना दी जाती है। ऋण का पूरा भुगतान कर दिए जाने के बाद यह सूचना अप्रभावी हो जाती है। वैसे तो किसी भी विधिक स्वामित्व वाली सम्पत्ति को बंधक रखा जा सकता है, लेकिन वास्तविक सम्पत्ति (भूमि एवं भवन) सबसे आम हैं।

  • नामिती

    नामिती वह व्यक्ति होता है, जिसे पॉलिसीधारक अपनी मृत्यु की स्थिति में लाभ प्राप्त करने के लिए चुनता है। इस प्रकार यह एक जीवन बीमा नीति के अन्तर्गत क्लेम के निपटाने पर बीमा कम्पनी को एक वैध मोचन (वैलिड डिस्चार्ज) प्रदान करता है।

  • पेड अप पॉलिसी

    यह एक ऐसी बीमा पॉलिसी होती है, जिसमें आगे प्रीमियम का भुगतान करने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन यह पॉलिसी गणना की गई पेड अप वैल्यू के अनुसार कवरेज प्रदान करती रहती है।

  • पार्टिसिपेटिंग पॉलिसीज

    इन्हें "पार पॉलिसीज" अथवा "मुनाफे में प्रतिभागिता वाली पॉलिसी" भी कहते हैं। एक प्रतिभागी जीवन बीमा पॉलिसी एक ऐसी पॉलिसी होती है, जिसमें जीवन बीमा कम्पनी द्वारा बोनस का भुगतान किया है।

  • पॉलिसीधारक

    यह व्यक्ति बीमा पॉलिसी का स्वामित्व होता है।

  • पॉलिसी टर्म

    यह वह अवधि होती है, जिसके दौरान बीमा कवर उपलब्ध होता है।

  • प्रीमियम

    यह जीवन बीमा पॉलिसी के अन्तर्गत बीमित व्यक्ति द्वारा बीमा कम्पनी को एकमुश्त या फिर किश्तों में दी जाने वाली राशि होती है।

  • पॉलिसी दस्तावेज

    यह बीमा कम्पनी द्वारा पॉलिसीधारक को जारी किया जाने वाला दस्तावेज होता है, जिसमें उस पॉलिसी की नियम एवं शर्तों, उत्पाद सूचना तथा लाभ, प्रीमियम अनुसूची आदि लिखा होता है।

  • प्रीमियम भुगतान अवधि

    यह वह अवधि होती है, जब तक एक बीमित व्यक्ति अपने बीमा कवर के लिए भुगतान करने का वचन देता है।

  • प्रस्ताव प्रपत्र

    यह आवेदन प्रपत्र होता है, जिसे एक बीमा पॉलिसी लेने के लिए भरा जाता है।

  • राइडर्स

    राइडर्स किसी पॉलिसीधारक के पास उपलब्ध ऐसे ऐड-ऑन विकल्प होते हैं, जो उसे अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं।

  • एकल प्रीमियम

    यह जीवन बीमा पॉलिसी के लिए दी जाने वाली एक मुश्त धनराशि होती है।

  • स्टैम्प ड्यूटी

    यह एक टैक्स होता है, जो शेयर तथा अन्य परिसम्पत्तियां जैसे कि घर या जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने पर अधिभारित किया जाता है।

  • सम एश्योर्ड

    सम एश्योर्ड वह धनराशि होती है, जो एक बीमा कम्पनी - एक पहले से वर्णित आकस्मिकता घटित होने की स्थिति में भुगतान करने के लिए सहमत होती है।

  • सरेन्डर

    यह मैच्योरिटी तिथि से पहले या भुगतान योग्य बनने से पहले ही एक बीमा संविदा को निरस्त करके सरेन्डर वैल्यू स्वीकार करना होता है।

  • सरेन्डर वैल्यू

    सरेन्डर वैल्यू किसी पॉलिसीधारक को भुगतान की जाने वाली वह धनराशि होती है, जब वह किसी पॉलिसी के अन्तर्गत अपने अधिकारों का त्याग (सरेन्डर) कर देता है और अपने बीमा संविदा को समाप्त कर देता है।

  • उत्तरजीविता लाभ

    उत्तरजीविता लाभ वह लाभ होता है जो पॉलिसी चलने की अवधि में या पॉलिसी पूर्ण होने पर पॉलिसी धारक को दी जाती है। मनी बैक पॉलिसी की स्थिति में बीमित व्यक्ति को नियमित समय अन्तराल पर एक निश्चित पूर्व-निर्धारित धनराशि का भुगतान किया जाता है। उत्तरजीविता लाभ केवल उन्हीं मामलों पर लागू होता है, जिसमें बीमित व्यक्ति जीवित होता है।

  • टर्म इंश्योरेंस

    टर्म इंश्योरेंस एक प्रकार का लाइफ कवर है, यह एक निर्धारित समय अवधि के दौरान कवरेज प्रदान करता है, तथा यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नामिती को मृत्यु लाभ का भुगतान किया जाता है।

  • टॉप अप

    टॉप-अप प्रीमियम के अलावा एक अतिरिक्त धनराशि होती है, जो पॉलिसीधारक बाजार से लाभ कमाने के लिए निवेश कर सकता है। ऐसा केवल यूनिट लिंक्ड पॉलिसियों में किया जा सकता है, बशर्ते कि पॉलिसी में यह सुविधा उपलब्ध हो।

  • अंडरराइटर (जोखिम अंकक)

    अंडरराइटर किसी बीमा कम्पनी की ओर से जोखिमों से स्वीकार या अस्वीकार करता है। अंडरराइटर आवेदनों की समीक्षा करता है, और यह निर्णय लेता है कि आवेदन को बीमा दिया जाना है या नहीं (अर्थात जोखिम स्वीकार करना है या नहीं)।

  • अंडरराइटिंग (जोखिम अंकन)

    अंडरराइटिंग शब्द का प्रयोग बीमा कम्पनियां जोखिम मूल्यांकन की प्रक्रिया को वर्णित करने के लिए करती हैं। किसी जोखिम को अंडरराइट करने में महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार किया जाता है, जिसके आधार पर जोखिम स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय लिया जाता है और प्रीमियम की दर निर्धारित की जाती है।

  • यूनिट लिंक्ड

    यह एक प्रकार का दीर्घकालिक बचत प्लान होता है, जिसमें प्रीमियम की धनराशि से किसी निवेश फंड, जैसे कि यूनिट ट्रस्ट, में यूनिट खरीदी जाती हैं। फंड की परिसम्पत्तियों में स्टॉक, शेयर, बॉण्ड, प्रॉपर्टी, तथा अन्य प्रतिभूतियों का मिश्रण शामिल हो सकता है। इसमें फंड की परिसम्पत्तियों के निवेश प्रदर्शन के आधार पर यूनिट के मूल्य तथा उनसे मिलने वाले प्रतिफल में उतार-चढ़ाव आ सकता है, तथा इसमें इस बात की कोई गारन्टी नहीं होती कि पूंजी वापस मिलेगी या नहीं।

  • निहित आयु (वेस्टिंग ऐज)

    यह वह आयु होती है, जिस आयु पर किसी बीमा-सह-पेंशन पॉलिसी में किस बीमित व्यक्ति को बीमा कम्पनी पेंशन देना आरम्भ करती है।

  • होल लाइफ इंश्योरेंस

    यह एक जीवन बीमा पॉलिसी होती है, जिसमें बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर ही लाभार्थी को लाभों का भुगतान किया जाता है, यह मृत्यु चाहे जब हो। इसमें प्रीमियम भुगतान एक निश्चित वर्षों तक या पूरे जीवन तक हो सकता है।